IIT Madras students advance India's Hyperloop dream
Source -X- India tech and infraआईआईटी कानपुर ने पूरा किया ईलॉन मस्क का सपना l
नवोन्मेष: देश में परिवहन की सूरत बदल देगी हाईपरलूप तकनीक, IIT मद्रास को पॉड बनाने में मिली सफलता
सार्वजनिक परिवहन को अत्याधुनिक बनाने के साथ तेज गति देने पर देश में बीते कुछ समय से काफी नवोन्मेष हो रहा है। यात्री ट्रेन की गति बढ़ाने के साथ मालगाड़ी की रफ्तार भी तेज की जा रही है।
टेस्ला के सीईओ ईलॉन मस्क ने साल 2013 में ट्यूब में चलने वाली हाइपरलूप ट्रेन का कॉन्सेप्ट दुनिया के सामने रखा था। अब 10 साल उनका यह कॉन्सेप्ट हकीकत में बदला है, वह भी आईआईटी कानपुर में। दरअसल, आईआईटी कानपुर ने माल ढोने वाली कार्गो हाइपर लूप ट्रेन की डिजाइन तैयार कर ली है।
शहरों के बीच रैपिड रेल ट्रांजिट सिस्टम जैसे नए परिवहन माध्यम तैयार हो चुके हैं। इसी क्रम में परिवहन का ‘भविष्य’ तैयार करने में आईआईटी मद्रास ने तेज कदम बढ़ाए हैं।
इसे तैयार करने वाले प्रफेसर बिशाख भट्टाचार्य का कहना है कि अगर सरकार मौका दे, तो प्री-फैब्रिकेटिड तकनीक से एक साल में हाइपर लूप का पायलट प्रोजेक्ट तैयार कर लिया जाएगा। एक किमी निर्माण की लागत सिर्फ 15 लाख रुपये आएगी। एक बार कार्गो हाइपर लूप रूट तैयार होने के बाद पावर प्लांटों में कोयला स्टॉक करने का झंझट खत्म हो जाएगा, क्योंकि प्लांटों को 2.7 टन/मिनट की रफ्तार से कोयला भेजा जा सकेगा।
मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रफेसर बिशाख भट्टाचार्य ने बताया कि हमारे देश में फिलहाल यात्री ट्रेनें और मालगाड़ियां एक ही ट्रैक पर चलती हैं। माल ढुलाई के लिए अलग से फ्रेट कॉरिडोर भी बनाए जा रहे हैं। खुले में मालगाड़ियों के संचालन में चोरी के अलावा प्रदूषण भी एक समस्या है। मालगाड़ियों की रफ्तार भी बढ़ाने की जरूरत है. इसके लिए लंबे समय से हाइपर लूप डिजाइन पर काम किया जा रहा था। लंबे रिसचे के बाद हाइपरलूप की डिजाइन तैयार कर ली गई।
आईआईटी कानपुर की लैब में विकसित हाइपरलूप डिजाइन में प्री-फैब्रिकेटिड तरीके से 1 मीटर व्यास की ट्यूब बनाई जाएंगी। ये ट्यूब कोयला खदान से पावर प्लांट तक बनेगी। ट्यूब के अंदर हवा के प्रेशर से कोयले से भरे वैगन दौड़ेंगे। यह भी संभव है कि वैगन के पहिए हवा में रहें। इनकी स्पीड 100 से 150 किमी के बीच हो सकेगी। हर मिनट 2.7 टन कोयला प्लांट को सप्लाई किया जा सकेगा। 500 मेगावॉट क्षमता का बिजलीघर बिना कोयला स्टॉक किए ही लगातार आपूर्ति से चल सकेगा।
ये एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया होगी, जिसमें रोबोट वीकल जरूरत के हिसाब से दौड़ते रहेंगे। एक लूप के समानांतर दूसरा लूप बनाकर माल परिवहन की कुशलता बढ़ाई जा सकेगी। रोबोट वीकल का एक हिस्सा करीब के दूसरे मॉड्यूल से जुड़ा होगा। जिससे तीखे मोड़ों पर भी वैगन को गुजरने में दिक्कत नहीं होगी। इससे माल की परिवहन लागत घटेगी। इस सिस्टम में 107 किलोवॉट बिजली की खपत होगी।
प्रफेसर भट्टाचार्य ने बताया कि एक अमेरिकी कंपनी की मदद से आईआईटी मद्रास में हाइपरलूप प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है, लेकिन उसमें ट्यूब की लागत ही करोड़ों में होगी। जबकि आईआईटी कानपुर ने सस्ते मटीरियल से बनने वाली डिजाइन विकसित की है। फ्लिपकार्ट ने भी माल डिलिवरी के लिए इस तकनीक में दिलचस्पी दिखाई है। आईआईटी कानपुर ने पेटेंट के लिए भी आवेदन कर दिया है।



